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Author name: ujjain_pride

व्यक्तित्व

प्रो. आद्या रंगाचार्य: कालिदास अकादमी, उज्जैन के प्रथम निदेशक

उज्जैन, जिसे भारतीय संस्कृति और साहित्य का तीर्थस्थल कहा जाता है, ने कालिदास अकादमी के रूप में एक ऐसी संस्था को जन्म दिया, जिसने भारतीय परंपरा, कला और साहित्य को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया। इस अकादमी के पहले निदेशक प्रो. आद्या रंगाचार्य न केवल एक विद्वान बल्कि भारतीय नाट्यशास्त्र और संस्कृति के प्रखर संरक्षक थे। […]

ऐतिहासिक, पौराणिक

उज्जैन का गौरव: टॉवर चौक

टॉवर चौक, उज्जैन का एक ऐसा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थान है जो शहर की धड़कन के समान है। यह चौक न केवल उज्जैन के व्यापारिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र है, बल्कि इसके मध्य में स्थित घड़ी वाला ऐतिहासिक टॉवर इसे एक विशिष्ट पहचान देता है। ⏳ इतिहास की झलक: टॉवर चौक का निर्माण ब्रिटिश

पौराणिक

राणो जी की छत्री – उज्जैन का ऐतिहासिक गौरव

उज्जैन, भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नगरी, अनगिनत अद्भुत स्थलों से सजी हुई है। इन्हीं में से एक अनमोल धरोहर है राणो जी की छत्री, जो पवित्र रामघाटपर क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यह छत्री न केवल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि होलकर वंश की धार्मिकता, कला प्रेम और इतिहास का जीता-जागता

संस्कृति और धरोहर

कालिदास संस्कृत अकादमी: उज्जैन की सांस्कृतिक धरोहर

उज्जैन की सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा “कालिदास अकादमी” है। यह अकादमी भारतीय संस्कृति, साहित्य, और कला के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित है। कालिदास अकादमी का नाम महान संस्कृत कवि “कालिदास” के नाम पर रखा गया है, जिनकी रचनाएँ भारतीय साहित्य का अभिन्न हिस्सा हैं। कालिदास संस्कृत अकादमी का महत्व: कालिदास

पौराणिक

उज्जैन का जंतर मंतर: एक ऐतिहासिक धरोहर

उज्जैन, मध्य प्रदेश का एक प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, जो अपने ऐतिहासिक स्मारकों और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का “जंतर मंतर” भी एक अद्वितीय स्थल है, जिसे “महाराज जयसिंह द्वितीय” ने 1725 में बनवाया था। यह “खगोलशास्त्र” के अध्ययन के लिए एक महत्त्वपूर्ण स्थल है और भारतीय विज्ञान की समृद्धि

व्यक्तित्व

उज्जैन के वीर सपूत, बलराम जोशी, ने 1999 में हुए कारगिल

युद्ध में अद्वितीय साहस और वीरता का परिचय दिया। उनकी बहादुरी और बलिदान ने न केवल उज्जैन, बल्कि पूरे देश को गर्वित किया। प्रारंभिक जीवन और सैन्य सेवा: बलराम जोशी का जन्म उज्जैन में हुआ था। उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स में अपनी सेवा शुरू की। उनकी नेतृत्व क्षमता

सामाजिक

विनोद मिल और हीरा मिल, उज्जैन: इतिहास और पृष्ठभूमि

विनोद मिल और हीरा मिल उज्जैन के औद्योगिक गौरव के प्रतीक रहे हैं। इन दोनों मिलों ने शहर की अर्थव्यवस्था, रोजगार और सामाजिक संरचना को आकार देने में अहम भूमिका निभाई। विनोद मिल • स्थापना: 1935 में स्थापित, विनोद मिल उज्जैन की पहली प्रमुख कपड़ा मिलों में से एक थी। इसका उद्देश्य कपड़ा उत्पादन को

व्यक्तित्व

उज्जैन के पहले सांसद: पं. श्री राधेलाल बिहारीलाल व्यास

उज्जैन की समृद्ध संस्कृति और इतिहास में पं. श्री राधेलाल बिहारीलाल व्यास का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। 1952 में, भारत के पहले आम चुनाव में उज्जैन से सांसद बनने वाले ये महान स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक सुधारक और शिक्षाविद् थे। 🔷 स्वतंत्रता संग्राम के नायक महात्मा गांधी के आदर्शों से प्रेरित होकर पं. राधेलाल व्यास

व्यक्तित्व

उज्जैन के अमर गौरव: डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर

उज्जैन, जो स्वयं भारतीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का एक जीवंत उदाहरण है, ने डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर जैसे महान पुरातत्वविद् को जन्म दिया। उनका जीवन और कार्य केवल उज्जैन ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव की बात है। उज्जैन से उनका संबंध: डॉ. वाकणकर का जन्म 4 मई 1919 को हुआ। उन्होंने

संस्कृति और धरोहर

महर्षि सांदीपनि: उज्जैन की गौरवशाली परंपरा के प्रतीक

महर्षि सांदीपनि उज्जैन की पवित्र भूमि से जुड़े महान ऋषि और गुरु थे। यह माना जाता है कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण, उनके बड़े भाई बलराम और मित्र सुदामा को शिक्षा प्रदान की थी। उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम आज भी उनकी विद्वत्ता और शिक्षण परंपरा का सजीव प्रमाण है। महर्षि सांदीपनि ने अपने शिष्यों को वेद,

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